गिरफ्तारी अब होगी पारदर्शी
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्णय – लिखित में बताना होगा गिरफ्तारी का कारण


नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी भी आरोपी को गिरफ्तार करते समय उसकी गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी उसे लिखित में दी जानी अनिवार्य है, और वह जानकारी उसकी समझ की भाषा में होनी चाहिए।
यह आदेश पूर्णतः संवैधानिक अधिकार के रूप में मान्य है और इसे नजरअंदाज करना व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन माना जाएगा।

इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट की बेंच — मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और जस्टिस ए.जे. मसीह — ने मुंबई के एक हिट एंड रन मामले से जुड़ी याचिका की सुनवाई के दौरान सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:

गिरफ्तारी के समय अगर लिखित जानकारी देना संभव न हो
तो पहले मौखिक रूप से कारण बताया जाए

लेकिन लिखित जानकारी किसी भी स्थिति में
आरोपी को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने से कम से कम 2 घंटे पहले देनी होगी

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो गिरफ्तारी और रिमांड की प्रक्रिया अवैध मानी जाएगी और आरोपी को रिहा किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आगे से पुलिस और जांच एजेंसियों द्वारा की जाने वाली सभी गिरफ्तारियों पर सीधे लागू होगा।


पहले क्या होता था अब क्या अनिवार्य है

अक्सर बिना स्पष्टीकरण गिरफ्तारी हो जाती थी गिरफ्तारी का कारण लिखित में देना आवश्यक
जानकारी कई बार अस्पष्ट या तकनीकी भाषा में दी जाती थी आरोपी की समझ वाली भाषा में जानकारी देना ज़रूरी
गिरफ्तारी के कारण कभी-कभी बाद में पता चलते थे मजिस्ट्रेट के सामने पेशी से 2 घंटे पहले लिखित जानकारी देना अनिवार्य