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दादा धूनी वाले खण्डवा – गुरुपूर्णिमा विशेष
🔱 दादा धूनी वाले की संक्षिप्त जीवनगाथा:
दादा जी का असली नाम गहिनीनाथ था, जो नाथ संप्रदाय से थे। उन्होंने खण्डवा की पावन धरती पर कठोर तप कर धूनी रमाई और लोगों के कल्याण हेतु अपना जीवन समर्पित किया। उनका सादा जीवन, गहरी साधना और चमत्कारी कृपा आज भी लाखों लोगों की आस्था का केन्द्र है।
✨ महिमा और चमत्कार:
कहा जाता है कि दादा जी की कृपा से असाध्य रोग मिटते हैं, बिगड़े काम बनते हैं और दुखों का अंत होता है। भक्तों ने स्वयं अनुभव किया है कि सिर्फ धूनी के दर्शन मात्र से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है।
🙏 दर्शन और गुरुपूर्णिमा विशेष:
हर वर्ष गुरुपूर्णिमा पर खण्डवा में भक्तों का महासागर उमड़ पड़ता है। इस पावन दिन लाखों श्रद्धालु भारत के कोने-कोने से दर्शन को आते हैं।
जगह जगह होता है भंडारा प्रसाद वितरण
पैदल यात्रा मैं बच्चे बुजुर्ग सब जाते है गुरपूर्णिमा दर्शन के लिए खंडवा
🌼 2024 में अनुमानित 10 लाख से अधिक भक्त गुरुपूर्णिमा पर शामिल हुए।
🏛️ ट्रस्ट और व्यवस्था:
दादा धूनीवाले सेवा ट्रस्ट द्वारा संपूर्ण मंदिर व्यवस्था, निशान यात्रा, भंडारा और सुरक्षा का संचालन किया जाता है। ट्रस्ट के माध्यम से धर्मशालाएं, सामाजिक सेवा व धार्मिक आयोजन होते हैं।
🌍 भक्तों का विशाल परिवार:
दादा जी के देशभर में करोड़ों श्रद्धालु हैं — महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, छत्तीसगढ़ व दिल्ली जैसे राज्यों से हर वर्ष लाखों की संख्या में दर्शनार्थी खण्डवा पहुँचते हैं।
🕯️ पूजा विधि और दर्शन:
दादा जी के मंदिर में भक्त फूल, नारियल, धूप-दीप अर्पित करते हैं। “जय धूनीवाले दादा” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
धूनी के पास बैठना, उसकी भभूत लगाना और ध्यान करना— यही दादा जी की उपासना है।
🚩 निशान यात्रा का महत्व:
हर वर्ष विशाल निशान यात्रा निकाली जाती है, जिसमें भक्त अपने गाँव या शहर से पैदल चलकर निशान लेकर खण्डवा पहुँचते हैं। यह आस्था, समर्पण और चमत्कार का जीवंत प्रतीक है।
ग्लोबलज्ञान 24 न्यूज़ की तरफ़ से दादा धूनीवाले को शत्-शत् नमन।
💫 गुरुपूर्णिमा पर सभी भक्तों को ढेरों शुभकामनाएँ।
🙏 जय दादा धूनीवाले!










